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ट्रेडिंग माइंड सेट का मामला है , सम्यक प्रयत्न से ट्रेडिंग बेहतर बनाई जा सकती है .

 मई पिछले टिन चार साल से इस क्षेत्र में हूँ. मेरा विश्वास कीजिये , मैंने हर ट्रिक, हर रास्ता , हर जुगाड़ लगाया है . हर रणनीति को काम में लेकर देखा है , लेकिन स्थाई तौर पर मुझे ऐसा कुछ नहीं मिला , जिस्पा मै आँख मूंद कर भरोसा कर सकूं . ये सब जीवन के हर हिस्से पर लागु होता है , हम हर जगह हाथ पैर मारते है , हम हर सम्भव प्रयत्न करते है लेकिन हंसिले जिन्दगी कुछ भी नहीं है .  बुद्ध से किसी ने पूछा कि , प्रयत्न करने से कई बार वो सब हांसिल क्यों नहीं होता जो हम वास्तविक तौर पर हांसिल करना चाहते है .  बुध ने कहा कि हांसिल तो हो जाता है , क्यूंकि प्रयत्न खाली नहीं जाता . लेकिन वो जो आप प्राप्त करना चाहते है , उसे हांसिल करने के लिए 'प्रयत्न' कही नहीं है है . आपको 'सम्यक प्रयत्न ' करने होंगे. सम्यक प्रयत्न , यानि सही प्रयास . और ये सही प्रयास ही है , जो आपको रास्ता बताते है , आपको सही रस्ते पर लेकर जाते है .  अगर कोई अपनी गरीबी मिटने के लिए अपराध कर रहा है , तो उसे प्रयत्न करना तो कहेंगे लेकिन वो सही प्रयत्न नहीं है . सम्यक प्रयत्न से ही होगा . ट्रेडिंग में प्रयत्न सब करते है , ल...

ट्रेडिंग में टेक्निकल एनालिसिस , वास्तव में साइकोलोजिकल बिहेवियर का पेटर्न है .

 हर एक प्राइस स्टेटस पर तीन सम्भावनाएं मौजूद होती है . प्राइस यहाँ से नीचे आ सकता है . यहाँ से प्राइस ऊपर जा सकता है  प्राइस यही पर रेंज में रह सकता है . ये तीनो सम्भावनाये जीवन में , हमारे आसपास भी लगातार घटित होती रहती है .  यानि प्राइस और जिन्दगी , आम जीवन में गहरा तालमेल है . वो इसलिए क्यूंकि लोग ही प्राइस को बनाते है , वही चलाते है , वही उठाते और गिराते है . जो टेक्निकल एनालिसिस हम करते है , वो वास्तव में लोगो के मनोविज्ञान का एनालिसिस है .  यानी साइकोलोजी को समझने लग जाये , तो मार्किट की गणित और हर्ड बिहेवियर का अंदाजा लगाया जा सकता है .  मान लीजिये , दस हजार की एक भीड़ ने एक पॉइंट पर अपनी पोजीशन बनाई है , अब वो लोग मुनाफे की आस में कही न कही टारगेट लगाते है , और कही न कही स्टॉप लोस लगाते है . जहाँ से प्राइस वापस मुड़ता है , वहां उन लोगो का स्टॉप लोस और उन लोगो का टारगेट है .  इसी तरह ऐसे ही बहुत से ग्रुप्स है लोगो के जो इस तरह टारगेट और स्टॉप लोस लगाते है .  जब हम बड़े टाइम फ्रेम पर इस पूरी कहानी को देखने लगते है , तो हमे कुछ पेटर्न दिखाई देने लगते...

बदलाव के बीच ट्रेडिंग में टिके रहना , जीवन की तरह

चीजे बहुत तेज गति से बदलती है , यह सृष्टि का नियम है . यह प्रकृति का नियम है , बदलाव .  बदलाव हर अघ हो रहा है , आपके मेरे जीवन में , मार्किट में , प्राइस एक्शन में यही बदलाव हमे चार्ट पर दिखाई देता है . फिर बदलावों , स्पाइक आदि के बीच में हम अपने मन को और अपनी ट्रेडिंग को कैसे स्थिर करे .  बदलाव के नियम को स्वीकार करने पर हम यह बात भी स्वीकार कर सकते है कि इस केओस के बीच एक शांति भी है , जो मन को निरंतर आगे की तरफ ले जा रही है , समय भी तो यहाँ आगे ही बढ़ रहा है .  ट्रेडिंग में यह सारा परिवर्तन हमे एक रुख देता है , जैसा कि जीवन में भी बदलाव हमे एक रुख देता है .  ........... मार्किट मेरे अनुमान के अनुसार नहीं चला , थोडा चला भी , लेकिन वापस मुड गया . लेकिन इसमें मै क्या कर सकता हूँ , यह सब मेरे हाथ में तो नहीं है , मार्किट की अपनी गति है , उसे बदलना मेरे लिए असम्भव है . तो फिर मैं ही अपने आप को बदल लेता हूँ , अपना रुख बदल लेता हूँ .  यही होता है हमेशा , प्राइस हमारी दिशा में नहीं जाता और हम निराश हताश हो कर बैठ गए .  ये जो स्टॉप लोस होते है , वो असल में अंदर तक...

ट्रेडिंग साइकोलोजी और स्टेबल माइंडसेट से बड़ा बिजनेस खड़ा करना सम्भव लगता है

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ट्रेडिंग साइकोलोजी का कोर्स करने के बाद भी मैंने केपिटल वाइप आउट कर दिया.  असल मे कोर्स करने से आप प्रॉफिटबल तब तक नही हों सकते, जब तक आप ने जों सीखा है, उस पर आपका यकीन न हों. मैंने रिस्क मैनेजमेंट सीखा, साइकोलोजी सीखी, माइंड सेट सीखा. लेकिन उस पर मेरा यकीन सिर्फ प्रोफाइटेबल होने तक ही रहा. जैसे ही मेरी कुछ ट्रेड्स लॉस मे गयी. मै फिर से अंधाधुन ट्रेडिंग पर लौट आया.  जब वापस लौट कर देखा. जब खुद को देखा, अपनी साइकोलोजी को ब्रॉड स्पेक्टर्म मे समझा तो अंदर से आवाज आई कि, सब बेकार है. जब तक कि अपना सिस्टम डेवलप नही होगा, सब बेकार है.  असल मे मुझे ईंट ईंट जमा कर अपना सिस्टम बनाना चाहिये. जिसमे रिस्क मैनेजमेंट, पॉजिशन साइज, माइंडसेट, एंट्री, एग्जिट, सेटअप, टाइम फ्रेम, मनी विडराल शामिल हों.  और इस सिस्टम कि सफलता प्रॉफिट्स मे निहित नही है. इस सिस्टम को सफल तब माना जायेगा जब : मनी प्रोटेक्ट रहे, प्रॉफिट और लॉस मे स्पाइक्स नही आये, मेरी मानसिकता स्टेबल रहे, ओवर ट्रेडिंग खतम हों जाये, मै कंसिस्टेंट प्रेक्टिस मे आ जाऊं.  आज़ मुझे इस मानसिकता से ट्रेड करते हुए एक सप्ताह हों ...

दो दिन मे एक ट्रेड मिली, मिली और फिर चल पड़ी : माइंड सेट का नतीजा

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आजकल यह बात दिल मे बैठी हुईं है कि, ट्रेडिंग मे सफलता के गुणसूत्र सेटअप मे नही छुपे हुए है. ट्रेडिंग का असली राज माइंड सेट और साइकोलोजी मे है. मैंने अपनी साइकोलोजी को थिर करने के लिए अपने रिस्क को फिक्स कर लिया है. कुल केपिटल की 1% रिस्क.  इसी वजह से इमोशनल बेलेंस बना रहता है.  और फल यह निकलता है कि ट्रेडिंग इमोशनल न होकर स्थिर हों गयी है.  मुझे लगता है इस तरह कि प्रेक्टिस से मुझे एक दो महीने मे ट्रेड्स को लम्बा होल्ड करने का अनुभव भी आ जायेगा. कल क्या हुआ....!  दिन मे बिना सेटअप के दो ट्रेड लिए मैंने. दोनों मे स्टॉप लॉस हुए, एक मे तो मै एंटर करके ही वापस निकल गया. मुझे लग गया कि गलती हों गयी है.  शाम को जब मै घर बैठा था, तो मुझे अहसास हुआ कि इस जगह मेरी साइकोलोजी सेट हों रही है. अपना माइंड सेट स्टेबल महसूस किया मैंने.  ये गजब बात थी. ऐसा महसूस करना, यूँ था मानो मै अपने जोन मे, अपने केंद्र मे स्थिर हों गया हूं. जब पेनल ओपन किया तो मुझे सेटअप दिखा. माइंडसेट स्टेबल लगा. रिस्क मैनेज़ किया.  और मै बैठ गया ट्रेड मे. पिछले सात घंटे से देख रहा था सेटअप को, इंत...
अगर मुझे कन्फर्म हो गया  की आज से मेरी ट्रेडिंग के सारे कन्फ्यूजन  खत्म हो गए हैं तो आगे में क्या करूंगा?   मुझे लगता है कि किसी भी ट्रेडर  को कभी न कभी तो यह स्वीकार करना होता है, सफल ट्रेडर  को ,की उसके सारे कंफ्यूजन अब समाप्त हो गए हैं. और अब से वो भविष्य  में जो भी ट्रेड करेगा , उन ट्रेड्स का  उसे एक सिस्टम मालूम हो चुका है. एक रोडमेप मिल चुका है .  यानी वह अपनी ट्रेडिंग यात्रा में उस पड़ाव पर आ चुका है, जहां पर उसे अपनी साइकोलॉजी, अपना माइंडसेट, अपनी रणनीति ,अपने एग्जिट, और एंट्री सब कुछ क्लियर हो गए हैं.  मैं अब से अपनी जिंदगी को एक नया आयाम देना चाहता हूं जहां मेरी खुद की रुचिया, मेरी जिम्मेदारियां, मेरी हेल्थ , मेरे परिवार के प्रति मेरी भावनाएं समानांतर रूप से चलती रहेगी.  और मैं अपने काम को अपने सिस्टम के अनुसार करता रहूंगा.  यह एक लंबी और बड़ी दुर्गम यात्रा  थी. लगभग तीन से चार साल की ,जहां पर मुझे इस बात से लगातार जूझना पड़ा कि ट्रेडिंग में मैं क्या करूंगा ,और किस तरह से मैं आगे बढूँगा .  लेकिन क्योंकि यह स...

कल कि ट्रेड ने छः सात घंटे इंतज़ार करवाया .

 कल का दिन बढ़िया रहा . दिन के तक़रीबन तीन बजे मैंने चार्ट खोला , और ट्रेड को समझने लगा. अलग अलग टाइम फ्रेम में मैंने  देखा कि, ऊपर कि तरफ ब्रेक आउट हो सकता है , प्राइस लगभग सोलह घंटे से एक रेंज में बना हुआ था . इंतज़ार किया और शाम को लगभग आठ बजे , मुझे ट्रेड पञ्च करने का मौका मिला . ट्रेड चलने लगी , और एक डेढ़ घंटे बाद , प्राइस  नीचे आकर ऊपर कि तरफ मुड़ा, तो मैंने फिर से उसमे पोजीशन ऐड कर दी. मैंने पचास प्रतिशत क्वांटिटी बढ़ा दी थी . अगले एक घंटे में मुझे अपनी कैपिटल का दस प्रतिशत मुनाफा दिखने लगा , और यहाँ मैंने अपनी पोजीशन से एग्जिट कर दिया .  इस ट्रेड कि सफलता के क्या कारण थे  ? 1. पहली वजह तो मेरा माइंड सेट था , मैं  सुबह से ही यह बात मन में रखे हुए था , कि सेटअप बनेगा तो ट्रेड लेनी चाहिए अपन को , वरना अपन छोड़ देंगे . क्यूंकि केपिटल को बेवजह रिस्क पर ले जाना मुर्खता है . अब अपन अपने हिसाब से ट्रेड करेंगे, मार्किट के हिसाब से नहीं . मार्किट तो हर दो मिनट में ट्रेड शो करता है .  2. दूसरी वजह थी , कि मैं अपनी केपिटल का एक से दो प्रतिशत ही रिस्क ले रहा था ,...