ट्रेडिंग साइकोलोजी और स्टेबल माइंडसेट से बड़ा बिजनेस खड़ा करना सम्भव लगता है
ट्रेडिंग साइकोलोजी का कोर्स करने के बाद भी मैंने केपिटल वाइप आउट कर दिया.
असल मे कोर्स करने से आप प्रॉफिटबल तब तक नही हों सकते, जब तक आप ने जों सीखा है, उस पर आपका यकीन न हों.
मैंने रिस्क मैनेजमेंट सीखा, साइकोलोजी सीखी, माइंड सेट सीखा. लेकिन उस पर मेरा यकीन सिर्फ प्रोफाइटेबल होने तक ही रहा. जैसे ही मेरी कुछ ट्रेड्स लॉस मे गयी. मै फिर से अंधाधुन ट्रेडिंग पर लौट आया.
जब वापस लौट कर देखा. जब खुद को देखा, अपनी साइकोलोजी को ब्रॉड स्पेक्टर्म मे समझा तो अंदर से आवाज आई कि, सब बेकार है. जब तक कि अपना सिस्टम डेवलप नही होगा, सब बेकार है.
असल मे मुझे ईंट ईंट जमा कर अपना सिस्टम बनाना चाहिये.
जिसमे रिस्क मैनेजमेंट, पॉजिशन साइज, माइंडसेट, एंट्री, एग्जिट, सेटअप, टाइम फ्रेम, मनी विडराल शामिल हों.
और इस सिस्टम कि सफलता प्रॉफिट्स मे निहित नही है. इस सिस्टम को सफल तब माना जायेगा जब : मनी प्रोटेक्ट रहे, प्रॉफिट और लॉस मे स्पाइक्स नही आये, मेरी मानसिकता स्टेबल रहे, ओवर ट्रेडिंग खतम हों जाये, मै कंसिस्टेंट प्रेक्टिस मे आ जाऊं.
आज़ मुझे इस मानसिकता से ट्रेड करते हुए एक सप्ताह हों गया है.
मैंने पचास हजार के केपिटल पर अढ़ाई हजार विड्राल किये है. और मै दिन भर ट्रेडिंग प्रॉफिट लॉस के बारे मे नही सोचता हूं.
मुझे लगता है कि लगातार अगर मै इस पर टिका रहूंगा, तो कम्पउंडिंग से अच्छा बिजनेस बना लूंगा.
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