ट्रेडिंग में टेक्निकल एनालिसिस , वास्तव में साइकोलोजिकल बिहेवियर का पेटर्न है .
हर एक प्राइस स्टेटस पर तीन सम्भावनाएं मौजूद होती है .
प्राइस यहाँ से नीचे आ सकता है .
यहाँ से प्राइस ऊपर जा सकता है
प्राइस यही पर रेंज में रह सकता है .
ये तीनो सम्भावनाये जीवन में , हमारे आसपास भी लगातार घटित होती रहती है .
यानि प्राइस और जिन्दगी , आम जीवन में गहरा तालमेल है . वो इसलिए क्यूंकि लोग ही प्राइस को बनाते है , वही चलाते है , वही उठाते और गिराते है .
जो टेक्निकल एनालिसिस हम करते है , वो वास्तव में लोगो के मनोविज्ञान का एनालिसिस है .
यानी साइकोलोजी को समझने लग जाये , तो मार्किट की गणित और हर्ड बिहेवियर का अंदाजा लगाया जा सकता है .
मान लीजिये , दस हजार की एक भीड़ ने एक पॉइंट पर अपनी पोजीशन बनाई है , अब वो लोग मुनाफे की आस में कही न कही टारगेट लगाते है , और कही न कही स्टॉप लोस लगाते है .
जहाँ से प्राइस वापस मुड़ता है , वहां उन लोगो का स्टॉप लोस और उन लोगो का टारगेट है .
इसी तरह ऐसे ही बहुत से ग्रुप्स है लोगो के जो इस तरह टारगेट और स्टॉप लोस लगाते है .
जब हम बड़े टाइम फ्रेम पर इस पूरी कहानी को देखने लगते है , तो हमे कुछ पेटर्न दिखाई देने लगते है , लोगो के स्टॉप लोस और टारगेट साफ़ दिखाई देते है .
इसे हम सपोर्ट यानि स्टॉप लोस और रेजिस्टेंस यानि टारगेट पहचान में आ जाते है .
यही पेटर्न , साइकोलोजिकल बिहेवियर मार्किट में टेक्निकल एनालिसिस के तौर पर चलता है .
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