ट्रेडिंग का रास्ता बड़ा कठिन है साथी .
कल मै 'टॉम होगार्ड' को सुन रहा था .
टॉम बहुत बड़े केपिटल से ट्रेड करते है , वे फंड मेनेजर है शायद . और स्वयम भी ट्रेड करते है . बड़ी पोपुलर किताबे भी टॉम ने लिखी है .
मै अपनी ट्रेडिंग साइकोलोजी को बेहतर करना चाहता हूँ , इसलिए मैंने निर्णय किया है कि, मै साइकोलोजी बिल्डिंग से सम्बन्धित किताबे, वीडियो , और पॉइंट्स पर ध्यान दूंगा . ताकि साइकोलोजी बिल्ट हो सके . कहते है , बेहतर बनना है तो पहले बेहतरीन लोगो , और विचारो में रहो .
फिर उन बातो को प्रेक्टिस करो . आप वैसे ही बन जाओगे.
पापा बचपन में कहते थे , ''जो जैसे सोचता है , जैसा करता है , वैसा ही बन जाता है .''
खैर ! आखिर मुझे साइकोलोजी बिल्डिंग की जरूरत क्यों पड़ी ?
इस के अहम और गहरे कारण है ;
1. पहली बात तो यह है कि , मुझे ट्रेडिंग को अपनी लाइफ स्टाइल का हिस्सा बनाना है . हालाँकि यह मेरी लाइफ स्टाइल का हिस्सा है . लेकिन एक गहराई , क्लिय्र्नेस तो होनी चाहिए . ताकि लम्बे समय तक मै इसे अपने भीतर अब्जोर्ब कर सकूँ .
2. मैंने यह महसूस किया है कि, जब माइंड सेट कंक्रीट रहता है , तो मन इधर उधर नहीं भागता है . आपका रीजन , कॉज , एथिकल बेक ग्राउंड मजबूत होगा तो आप उस काम को पूरी आत्मा से कर पाते है . जैसे कि जब मई कॉलेज में एक्टिव होकर काम कर रहा था . तब मै अपने वजूद को जस्टिफाई करते हुए उस काम में अपनी पूरी हिम्मत मेहनत और नीयत से कर पा रहा था . ऐसे में बहुत जरुरी है कि मेरी साइकोलोजी और माइंड सेट पूरी तरह से क्लियर होना चाहिए .
३. ट्रेडिंग मेरे लिए सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं है . मै समझता हूँ कि ये मेरी पर्सनलिटी का आइना है . इसके जरिये मेरी जल्दबाजी , संतोष , धीरज आदि चीजो का मालूम चलता है . ऐसे में यह प्रेक्टिस मेरी लाइफ को पोजिटिव रस्ते पर ले जाएगी . एक तरफ तो मै अपने आप को बड़ा विवेकशील इंसान मानता हूँ , दूसरी तरफ मेरे ट्रेडिंग एक्शन बहुत बार इम्पल्सिव हो जाते है . इस डिफ़रेंस को प्रेक्टिकली ट्रेडिंग में घटित होते देखता हूँ , तो मुझे मालूम पड़ता है , कि साइकोलोजिक्ली कितना डिफ़रेंस है मेरे सोचने और मेरे एक्ट करने में . ट्रेडिंग के जरिये मै अपने अंदरूनी मन को समझ कर उसे 'फिक्स' कर सकता हूँ.
अच्छा मैंने क्या सीखा कल !
हर बार सीखना नया नहीं होता है . कई दफा आपको लगता है कि , आप यह बात तो पहले से ही जानते है . लेकिन जब आप किसी बात को नए तरीके से सुनते है , तो लगता है , हां, यह बात वाकई बड़ी जोरदार कही है कहने वाले ने.
टॉम ने कहा कि, प्रक्टिस करने से आप परफेक्ट नहीं होते है . प्रक्टिस करने से असल में चीजे परमानेंट होती है . बात सही है . यह बात मेरे मन में यूँ बैठी की, बार बार प्रयास करने से एक तरफ़ा फायदा नहीं होता है. जैसा कि गौतम बुद्ध कहते है ; सम्यक प्रयत्न , अर्थात प्रयत्न भी सही दिशा में होने चाहिए. अन्यथा हम क्या क्या से क्या हो जायेंगे. रास्ता अगर अँधेरे की तरफ जा रहा है, तो सम्भावना है कि कोई अँधेरे में ही चलता रहे .
ट्रेडिंग का रास्ता समुचित स्त्रेत्र्जी से होकर नहीं जाता है . ट्रेडर्स की दुनिया दिन रात चार्ट आदि ही स्टडी करती है . लेकिन फिर भी यहाँ फेल्युर रेट नब्बे प्रतिशत से ज्यादा है . साफ़ है कि ये रणनीति कि बात नहीं है , ये बात है मंद सेट और साइकोलोजी की.
बात अच्छी लगी है , तो अपने ट्रेडर साथी से शेयर करे . धन्यवाद.
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