ट्रेडिंग हो या जिन्दगी आँखे खुलने में एक पलक लगती है दोस्त
कल का सारा दिन इस बात को सोचते विचारते हुए गुजरा कि मै वाकई ट्रेडिंग अच्छा कर सकता हूँ , बस मै अब तक कुछ मुलभुत बातों को समझ नहीं पा रहा था.
वो मूल भुत बाते आखिर क्या थी ?
1. पहली बात तो यह है की मै अब तक एक ही चीज के पीछे भाग रहा था , पेटर्न यानि एक रणनीति के पीछे .
और आप देखिये कि, स्ट्रेटजी के पीछे भागते भागते मैंने अपनी तकनीक को इतना अच्छा तो कर लिया कि चालीस पर्सेट की अक्युरेस हांसिल कर चूका हूँ.
2. दूसरी बात , मैं अब तक एक महीने में अपनी फाईनेंशियल स्टेबिलिटी को हांसिल करना चाह रहा था. कितनी अजीब बात है , एक सामान्य चाय वाला भी जब अपना काम धंधा शुरू करता है , तो वो लगभग एक लाख रूपए से काम को शुरू करता है , और धीरे धीरे एक साल दो साल में वो प्रॉफिट को घर लेकर जाने कि स्तिथि में होता है . यहाँ तो मै दस हजार लगा कर एक महीने में तिस हजार रूपी कमाना चाहता था . यानि मेरी बिजनेस साइकोलोजी को ठीक करने कि जरुरत थी . जो कि मै अब तक नहीं कर पाया था .
३. पिछले दिनों कुछ बड़े ट्रेडर्स को पढ़ा , सुना ,कुछ कोर्सेज किये तो मालूम हुआ कि मार्किट एक रेंडम चीज है , अगर यहाँ सब कुछ कन्फर्म होता तो लोग इतनी मेहनत के बाद भी लोस में नहीं रहते .
4. मुझे एक बात तो समझ में आ गयी है , कि जब यहाँ कुछ कन्फर्म नहीं है . जब इतना चार्ट रीडिंग के बाद भी मैं स्ट्रगल कर रहा हूँ तो भाईसाब मेरा मेनेजमेंट सही नहीं है . और वो मेरे पैसे का मेनेजमेंट है , जो ठीक नहीं है . मेरा छोटा भाई हालाँकि एस बात को बता बता कर थक गया है मुझे . पर मुझे कभी तो सच्चाई से रूबरू होना ही होगा .
5. अगर रिस्क मेनेज नहीं है तो जीवन में सब कुछ उथल पुथल से भरा होगा . हम कितने ही अच्छे भाव से चीजो को लेकर आगर बढ़ते हो , लेकिन मेथ्स किसी कि फ्रेंड नहीं है , आपको कभी इस बात का प्रिविलेज नहीं मिल सकता है कि आप अच्छे व्यक्ति है लेकिन आपकी गणित अच्छी नहीं है . मेथ्स अपना काम करेगी , और आपका गणित अपना काम करेगा . यही नियम है . दो चीजे कभी आपसे में एक दुसरे का रास्ता नहीं काटती है . लोग भले ही ऐसा करते हो , लेकिन नियम एस नहीं करते है .
मै अपने माइंड सेट को बदल चूका हूँ, यह फेक्ट भी है कि माइंड सेट को बदलने में सिर्फ दो मिनट लगते है . इसी लिए तो कहते है कि अमुक बात को सुनकर उसकी आँखे खुल गयी है , आँखे पलक झपकते ही खुल जाती है . यानी बात को समझने में और मिन्द्सेट को बदलने में एक पलक का ही समय लगता है .
मै निरंतर इस चीज पर काम करना चाहता हूँ अब . अपने माइंड सेट और अपनी मानसिकता पर .
आपको लेख पसंद आया है तो , अपने मित्रो से इसे शेयर कीजिये . काया मालूम पलक झपकते ही किसी का माइंड सेट बदल जाये . वो असल ट्रेडिंग कि तरफ रुख कर लेवे .

Comments
Post a Comment